Guide (1965) – Part 2

With ten songs to its credit, Guide (1965) certainly merits a Part 2, so here I go. In Part 1, I had posted four giants of not only this film, but which would feature among the top songs of Sachin Dev Burman’s list, Shailendra’s list, Dev Anand’s List, Waheeda Rehman’s List, Mohammad Rafi’s list, Manna Dey’s, Lata Mangeshkar’s list, Kishore Kumar’s list and humbly… among my list of favorites. 🙂

Here are some more, I’ll go straight into each of them, because…

हा आ आ आ

दिन ढल जाए… हाय
रात न जाए
तू तो ना आये तेरी
याद सताये
दिन ढल जाए… हाय
रात न जाए
तू तो ना आये तेरी
याद सताये
दिन ढल जाए

प्यार में जिनके
सब जग छोड़ा
और हुए बदनाम
उनके ही हाथों
हाल हुआ ये
बैठे है दिल को थाम
अपने कभी थे
अब है पराए
दिन ढल जाए… हाय
तू तो ना आये तेरी
याद सताये
दिन ढल जाए

ऐसी ही रिमझिम
ऐसी फुहारे
ऐसी ही थी बरसात
ख़ुद से जुदा और
जग से पराये
हम दोनों थे साथ
फिर से वो सावन
अब क्यों ना आये
दिन ढल जाए… हाय
रात न जाए
तू तो ना आये तेरी
याद सताये
दिन ढल जाए

दिल के मेरे
पास हो इतने
फिर भी हो कितनी दूर
तुम मुझसे मैं
दिल से परेशाँ
दोनों हैं मजबूर
ऐसे में किसको कौन मनाये
दिन ढल जाए… हाय
रात न जाए
तू तो ना आये तेरी
याद सताये
दिन ढल जाए

Vaah… Rafi saab, Burman dada, Shailendra ji, vaah… albeit, dhal jaaye… kya kehna.

In the same mood… but the scene is now a grand staged set, let’s watch… as others may have done… mesmerized, listening to the voice, the words, and the composition… not to mention Waheeda – like a godess – in the backdrop.

क्या से क्या हो गया
बेवफ़ा.. आ आ आ
तेरे प्यार में
चाह क्या, क्या मिला
बेवफ़ा.. आ आ आ आ आ आ
तेरे प्यार में

उं … chorus humming
आ आ आ आ आ आ

चलो सुहाना भरम तो टूटा
जाना के हुस्न क्या है
हो ओ ओ
चलो सुहाना भरम तो टूटा
जाना के हुस्न क्या है
कहती है किसको प्यार दुनिया
क्या चीज़ क्या बाला है
दिल ने क्या न सहा
बेवफ़ा… आ आ आ
तेरे प्यार में
चाह क्या, क्या मिला
बेवफ़ा… आ आ आ आ आ आ
तेरे प्यार में

आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ

तेरे मेरे दिल के बीच अब तो
सदियों के फ़ासले हैं
हाँ …
तेरे मेरे दिल के बीच अब तो
सदियों के फ़ासले हैं
यक़ीन होगा किसे कि हम तुम
इक राह संग चले हैं
होना है और क्या
बेवफ़ा… आ आ आ
तेरे प्यार में

क्या से क्या हो गया
बेवफ़ा… आ आ आ
तेरे प्यार में

Listening to the songs above, one wonders where did it all begin that the pain of parting went so deep? To understand that, I take you to the beginning through the video below… the lyrics will follow the video. The dialogue between Dev Anand and Waheeda Rehman are important to the story and to this song… Rafi is Rafi, and Burman dada’s music just exquisite. The interludes… to die for! Sorry, I lack the vocabulary to express it in different words. Speaking of words, where did Shailendra come up with thoughts and lyrics such as these… romantic to the core.

तेरे मेरे सपने
अब एक रंग है
हो जहाँ भी ले जाएं राहें
हम संग है
हो
तेरे मेरे सपने
अब एक रंग है
हो जहाँ भी ले जाएं राहें
हम संग हैं

मेरे तेरे दिल का
तय था इक दिन मिलना
जैसे बहार आने पर
तय है फूल का खिलना
मेरे तेरे दिल का
तय था इक दिन मिलना
जैसे बहार आने पर
तय है फूल का खिलना
ओ मेरे जीवन साथी
तेरे मेरे सपने
अब एक रंग है
हो जहाँ भी ले जाएं राहें
हम संग है

तेरे दुःख अब मेरे
मेरे सुख अब तेरे
तेरे ये दो नैना
चाँद और सूरज मेरे
तेरे दुःख अब मेरे
मेरे सुख अब तेरे
तेरे ये दो नैना
चाँद और सूरज मेरे
ओ मेरे जीवन साथी
तेरे मेरे सपने
अब एक रंग है
हो जहाँ भी ले जाएं राहें
हम संग है

लाख मना ले दुनिया
साथ ना ये छूटेगा
आ के मेरे हाथों में
हाथ ना ये छूटेगा
लाख मना ले दुनिया
साथ ना ये छूटेगा
आ के मेरे हाथों में
हाथ ना ये छूटेगा
ओ मेरे जीवन साथी
तेरे मेरे सपने
अब एक रंग है
हो जहाँ भी ले जाएं राहें
हम संग है
हो
तेरे मेरे सपने
अब एक रंग है

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